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रविवार, 7 मार्च 2010

आपत्ति - [प्रतीक माहेश्वरी]

ऋषि फ़ोन पर बात कर रहा था, अपनी गर्लफ्रेंड, प्रीती से..
प्रीती उसे कह रही थी कि वो सुबह जल्दी उठा करे और इसके फायदे और निशाचर होने के नुक्सान बता रही थी..
ऋषि पूरे तन्मयता के साथ सुन रहा था.. आधे घंटे तक सुना..

उनके इस रिश्ते के बारे में ऋषि की माँ को पता था और उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी.. वो प्रीती को पसंद करती थी...
शाम को ऋषि ने माँ को बताया कि प्रीती ने कहा है कि सुबह जल्दी उठूं, तो कल से वो जल्दी उठेगा...
माँ ने सोचा, अच्छा है.. कम से कम इस रिश्ते से इसमें कुछ सुधार तो हो रहा है.. खुश हुई..

कहा - अगर जल्दी उठने की अच्छी आदत डाल ही रहे हो तो स्मोकिंग भी छोड़ दो..
ऋषि एकदम से पलटा और कहा - "माँ, अब फिर से अपना लेक्चर शुरू मत करो.." और उठकर चला गया..

अब माँ को आपत्ति हो रही थी.. उन्हें आभास हो रहा था.. एक अंधकारमय भविष्य का..
ऋषि को अपना बेटा कहने में संकोच होने लगा था... पर कुछ कर न सकीं...

शुक्रवार, 5 मार्च 2010

जाने हिन्दू से हूँ या मुसलमान का------[कविता]------शामिख फ़राज़

जाने हिन्दू से हूँ या मुसलमान का
क्या मज़हब मेरा मैं किस ईमान का
ज्यादा कुछ मालूम नहीं खुद के बारे में
बस भेस लिए हूँ इक इंसान का
उसके घरों का मज़हब यह समझाया मुझे
मस्जिद अल्लाह की है मंदिर भगवान का
माना तलवारें तो चलो बेज़मीर ठहरी
मगर क्या हुआ ज़मीर इंसान का
और मुझे देखो दोनों ही जगाएं सुबह में
शोर मंदिर की घंटियों का अज़ान का
लिखोगे तो हम लफ्ज़ ही बनेगा फ़राज़
लेके देखो 'ह' हिन्दू से और 'म' मुसलमान का.