तब रिश्ते
अग्नि के चारों ओर
फेरे दे कर
तपाये जाते
प्रण ले कर
निभाये भी जाते
और कई बार
रिश्तों मे
एक पल निभाना भी
हो जाता है कितना कठिन
तभी तो आजकल
लिखाये जाते हैं
अदालत मे और
बनाये जाते है
वकील दुआरा
अब कितना आसान हो गया
रिश्ते को तोड्ना
शब्द जोड्ना
और हो जाना
बन्धन से आज़ाद





