हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

मंगलवार, 29 सितंबर 2009

तब रिश्ते अग्नि के चारों ओर---------" निर्मला कपिला जी"



तब रिश्ते



अग्नि के चारों ओर



फेरे दे कर



तपाये जाते



प्रण ले कर



निभाये भी जाते




और कई बार



रिश्तों मे



एक पल निभाना भी



हो जाता है कितना कठिन



तभी तो आजकल




रिश्ते कागज़ पर




लिखाये जाते हैं



अदालत मे और



बनाये जाते है



वकील दुआरा



अब कितना आसान हो गया



रिश्ते को तोड्ना



कागज़ पर कुछ



शब्द जोड्ना



और हो जाना



बन्धन से आज़ाद

सोमवार, 28 सितंबर 2009

मुझ को खंजर थमा दिया जाए---------------"जतिन्दर परवाज़ "

मुझ को खंजर थमा दिया जाए



फिर मिरा इम्तिहाँ लिया जाए



ख़त को नज़रों से चूम लूँ पहले



फिर हवा में उड़ा दिया जाए



तोड़ना हो अगर सितारों को



आसमाँ को झुका लिया जाए



जिस पे नफरत के फूल उगते हों



उस शजर को गिरा दिया जाए



एक छप्पर अभी सलामत है




बारीशों को बता दिया जाए



सोचता हूँ के अब चरागों को



कोई सूरज दिखा दिया जाए