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रविवार, 15 नवंबर 2015

देश के भविष्य

बच्चो, तुम इस देश के भविष्य हो, तुम दिखते हो कभी, भूखे, नंगे || कभी पेट की क्षुधा से, बिलखते-रोते. एक हाथ से पैंट को पकड़े, दूजा रोटी को फैलाये || कभी मिल जाता है निवाला तो कभी पेट पकड़ जाते लेट, होली हो या दिवाली, हो तिरस्कृत मिलता खाना || जब बच्चे ऐसे है, तो देश का भविष्य कैसा होगा, फिर भीबच्चो, तुम ही इस देश के भविष्य हो || नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है...