हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

रविवार, 31 मई 2015

मेरी पहली दोस्त

जब हुआ मेरा सृजन, माँ की कोख से| मैं हो गया अचंभा, यह सोचकर|| कहाँ आ गया मैं, ये कौन लोग है मेरे इर्द-गिर्द| इसी परेशानी से, थक गया मैं रो-रोकर|| तभी एक कोमल हाथ, लिये हुये ममता का एहसास| दी तसल्ली और साहस, मेरा माथा चूमकर|| मेरे रोने पर दूध पिलाती, उसे पता होती मेरी हर जरूरत| चाहती है वो मुझे, अपनी जान से  भी बढ़कर|| उसकी मौजूदगी देती मेरे दिल को सुकून, जिसका मेरी जुबां पर पहले नाम आया| पहला कदम चला जिसकी, उंगली पकड़कर|...