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रविवार, 15 नवंबर 2015

देश के भविष्य

बच्चो, तुम इस देश के भविष्य हो, तुम दिखते हो कभी, भूखे, नंगे || कभी पेट की क्षुधा से, बिलखते-रोते. एक हाथ से पैंट को पकड़े, दूजा रोटी को फैलाये || कभी मिल जाता है निवाला तो कभी पेट पकड़ जाते लेट, होली हो या दिवाली, हो तिरस्कृत मिलता खाना || जब बच्चे ऐसे है, तो देश का भविष्य कैसा होगा, फिर भीबच्चो, तुम ही इस देश के भविष्य हो || नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है...

मंगलवार, 1 सितंबर 2015

कैलाश मानसरोवर यात्रा वृतांत द्वारा राजीव गुप्ता

आधुनिकीकरण के इस दौर में वर्तमान समय तथ्य – आधारित है परंतु यह भी सत्य है कि आस्था और तथ्य दो अलग – अलग बातें हैं. विज्ञान की भाषा में प्रकृति का आधार ऊर्जा है तो आस्था का आधार भाव है. आस्था की धुरी का केन्द्रबिन्दु इस भाव पर टिका है कि प्रकृति में एक सर्वशक्तिमान शक्ति है जो प्रकृति की नियंता है, उसे ही भगवान की संज्ञा दी जाती है. भारतीय चिंतन के अनुसार व्यक्ति जिस भाव से भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करता है, उसी अनुरूप उसे भगवान का...

रविवार, 31 मई 2015

मेरी पहली दोस्त

जब हुआ मेरा सृजन, माँ की कोख से| मैं हो गया अचंभा, यह सोचकर|| कहाँ आ गया मैं, ये कौन लोग है मेरे इर्द-गिर्द| इसी परेशानी से, थक गया मैं रो-रोकर|| तभी एक कोमल हाथ, लिये हुये ममता का एहसास| दी तसल्ली और साहस, मेरा माथा चूमकर|| मेरे रोने पर दूध पिलाती, उसे पता होती मेरी हर जरूरत| चाहती है वो मुझे, अपनी जान से  भी बढ़कर|| उसकी मौजूदगी देती मेरे दिल को सुकून, जिसका मेरी जुबां पर पहले नाम आया| पहला कदम चला जिसकी, उंगली पकड़कर|...

सोमवार, 9 मार्च 2015

स्त्री

महिला दिवस पर लिखी मेरी ये कविता विश्व की समस्त महिलाओं को समर्पित है : स्त्री होना, एक सहज साअनुभव हैक्यों, क्याक्या वो सब हैकुछ नहींनारी के रूप कोसुन, गुनमैं संतुष्ट नहीं थाबहन, बेटी, पत्नी, प्रेमिकाइनका स्वरुप भीकितना विस्तृतहो सकता, जितनाब्रह्मांड, का होता हैजब जाना, नारी उस वट वृक्षको जन्म देती हैजिसकी पूजासंसार करता हैजिसकी जड़इतनी विशाल होती हैकि जब थका मुसाफ़िरउसके तलेविश्राम करता हैतब कुछ क्षण बाद हीवो पाता हैशांति का प्रसादसुखांत,...