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मंगलवार, 28 जून 2011

अंडमान में 'सरस्वती सुमन' के लघु कथा विशेषांक का लोकार्पण और ''बदलते दौर में साहित्य के सरोकार'' विषय पर संगोष्ठी

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्टब्लेयर में सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘चेतना’ के तत्वाधान में स्वर्गीय सरस्वती सिंह की 11 वीं पुण्यतिथि पर 26 जून, 2011 को मेगापोड नेस्ट रिसार्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में देहरादून से प्रकाशित 'सरस्वती सुमन' पत्रिका के लघुकथा विशेषांक का विमोचन किया गया. इस अवसर पर ''बदलते दौर में साहित्य के सरोकार'' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री एस. एस. चौधरी, प्रधान वन...

शनिवार, 25 जून 2011

व्यंग्यः कांग्रेसी दांत - शम्भु चौधरी

जिस शख्स ने भी इस कहावत को ‘‘हाथी के दांत दिखने के और खाने के और’’लिखा, शायद उसे पता भी नहीं होगा कि भारत में एक राजनैतिक दल जिसका नाम कांग्रेस पार्टी है उसके लिए भी इस कहावत को लागू कर दिया जायेगा। जब से कांग्रेस जोंकपाल बनाम लोकपाल बिल बनाने के कसरत में लगी है कांग्रेस पार्टी नये-नये शब्दों का गठन कर कभी अन्ना हजारे तो कभी बाबा रामदेव पर हमला कर रही है तो कभी खुद का बचाव करने में। अब कांग्रेसियों ने दावा किया है कि पिछले 6 माह में इन लोगों ने 68 हजार करोड़ काले धन को सफेद बना दिया है। कांग्रेसीगण इस बात का जबाब हमें शायद नहीं देगी कारण की ‘‘हमरी...

बुधवार, 22 जून 2011

मुस्कानों में जहर को देखा.............श्यामल सुमन

घर के ऊपर घर को देखाऔर भागते शहर को देखाकिसे होश है एक दूजे कीमजलूमों पे कहर को देखातोता भी है मैना भी हैमगर प्यार में कसर को देखाहाथ मिलाते लोगों के भीमुस्कानों में जहर को देखाचकाचौंध है अंधियारे मेंथकी थकी सी सहर को देखाएक से एक भक्त लक्ष्मी केकोमलता पे असर को देखापानी को अब खेत तरसतेशहर बीच में नहर को देखाबढ़ता जंगल कंकरीट काजहाँ सिसकते शजर को देखायहाँ काफिया यह रदीफ हैसुमन तो केवल बहर को द...

रविवार, 12 जून 2011

मगर आँख में नीर है........................श्यामल सुमन

कंचन चमक शरीर हैमगर आँख में नीर हैजिसकी चाहत वही दूर मेंकैसी यह तकदीर हैमिल न पाते मिलकर के भीकिया लाख तदबीर हैलोक लाज की मजबूती सेहाथों में जंजीर हैदिल की बातें कहना मुश्किलपरम्परा शमसीर हैप्रेम परस्पर न हो दिल मेंव्यर्थ सभी तकरीर हैपी कर दर्द खुशी चेहरे परयही सुमन तस्वीर...

रविवार, 5 जून 2011

मैं हूँ पेड़.........सामाजिक कार्यकर्त्री दिव्या संजय जैन

मैं हूँ पेड़।नीम,बबुल,आम,बड़,पीपल,सागवान,सीसम और चन्दन का पेड़।मैं हूँ पेड़।मैं तुम्हें सब कुछ देता।फूल देता,फल देता।सूखने के बाद लकडी देता।और जो है सबसे आवष्यक कहलाती हैजो प्राणवायु,ऐसी ऑक्सीजन वो भी मैं ही तुम्हें देता।मैं हूँ पेड़।मैं तुम्हें सब कुछ देता।बदले में तुमसे क्या लेता,कुछ भी तो नहीं लेता।और तुम मुझे क्या देते ? बताओ तो जराहाँ लेकिन तुमकाटते हो मेरी टहनियाँ,मेरी शाखाएँ,मेरा तनामुझे लंगडा व लूला बनाते हो।मैं हूँ पेड़।मैं तुम्हें सब कुछ...

पर्यावरण दिवश {कविता} सन्तोष कुमार "प्यासा"

आओ सब मिल जुल कर एक संकल्प में बंध जाएं वृक्षारोपण कर पर्यावरण  दिवस मनाएं इस धरा पुन: वसुंधरा बनाएं शुद्ध, वायु से शुद्ध, जल से शुद्ध मृदा से पर्यावरण को सजाएं इस दिन को कभी न  भूलें कदम कदम पर वृक्ष लगा कर हर दिन "पर्यावरण  दिवस" मनाएं मृदा, वायु, जल को , कर प्रयास अमृतमय बनाएं सब मिल जुल कर एक ही गीत गाएं पर केवल गीत न गाएं निज प्रयास से, इस संकल्प को सार्थक बनाएं आओ सब मिल जुल कर एक संकल्प में बंध जाएं वृक्षारोपण कर पर्यावरण  दिवस मनाएं...