हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

क्षणिकाएं--------(वीनस)

निपटा जल्दी जल्दी
दुनियाभर के किस्से
घर- काम की बातें
खिड़की की देहलीज़ पर
रोज़ हाल ए दिल कहते सुनते हैं
मैं और चाँद !
***********

रात सरक सरक के काटें
ख़ामोशियों की राह बांचें
पल पल ढलते जाएँ
फिर भी नित रोज़ आयें
मैं और चाँद !

7 comments:

OM KASHYAP ने कहा…

सरल और स्पष्ट रचना

संतोष कुमार "प्यासा" ने कहा…

AKARSHAK
RACHANA...

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

bahut sundar kavita !

शिखा कौशिक ने कहा…

सुन्दर क्षणिकाएं .बधाई.

ktheLeo ने कहा…

वाह! चांद की गवाही खूब बयां की आपकी क्षणिकाओं ने!

venus****"ज़ोया" ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद

निर्मला कपिला ने कहा…

सुन्दर सहज भाव। बधाई।