रचनाओ के भरमार मे,
रचना अपरम्पार।
हे देवि अब जागो,
करो नारी विरोधी का संहार।
ये लड़का नारी को,
जींस पहनने नही देता।
लिख रचनाओ के जरिये ये,
रचना की ऐसी तैसी करता।।
हे देवि तुम अब उतरो,
जींस पहन के ही उतर।
न मिले जींस तो देवि,
तुम बरमूडा मे ही उतरो।। - प्रमेन्द्र
रचना अपरम्पार।
हे देवि अब जागो,
करो नारी विरोधी का संहार।
ये लड़का नारी को,
जींस पहनने नही देता।
लिख रचनाओ के जरिये ये,
रचना की ऐसी तैसी करता।।
हे देवि तुम अब उतरो,
जींस पहन के ही उतर।
न मिले जींस तो देवि,
तुम बरमूडा मे ही उतरो।। - प्रमेन्द्र