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शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

क्या है .....(ग़ज़ल)....मृतुन्जय जी

डर
,संशय ,बेचैनी क्या है 

हर
दिल में पुश्तैनी क्या है 

खूनों
के सौदागर पूछें 

साखी,
शबद ,रमैनी क्या है 

नदियां
सबकी आंखों में हैं 

गंग,
जमुन ,तिरवेनी क्या है 

दिल
को दिल से मिल जाने दो 

आरी
,चाकू ,छैनी क्या है 

सब
तो उसके ही बंदे हैं 

हिन्दू
,मुस्लिम, जैनी क्या है

3 comments:

neeshoo ने कहा…

डर
,संशय ,बेचैनी क्या है

हर
दिल में पुश्तैनी क्या है

dil ko tak utar gayi gazal

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

खूनों
के सौदागर पूछें

साखी,
शबद ,रमैनी क्या है

behad khubsurat sher hua hai ......

drshyam ने कहा…

.

खूनों के सौदागरों को क्या पता--- साखी सबद रमैनी, अधिकतर लोगों को नहीं पता;
--वाह ! क्या बात है, शानदार ,शुद्ध गज़ल, बधाई