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शनिवार, 12 जनवरी 2013

मां

 ममता और सौहार्द से बनी हुयी है मां !
कोई कहे कुमाता कोई माता लेकिन है मां !!
जिसके स्पर्श भर से बेता प्रसन्न हो उठता है !
जिसके उठने से ही सुरज भी उठता है !!
मां को देखकर बच्चा पुलकीत हो उठता है !
बच्चो को पाकर मां का रोम-रोम खिल उठता है !!
यौवन मे भी मां को बेटा लगता प्यारा !
बेटा समझ न पाता मन का है कच्चा !!
सारी दुनिया समझे उसे घोर कपुत !
मां को लगता बेटा सच्चा,वीर,सपुत !!
मां शब्द मे है ममता का एह्सास !
बरसो है पुराना मां का इतिहास !!

5 comments:

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

sujata ने कहा…

ati sunder. shayad ma abhi bhi dunia main apna mhatv rakhti hai.

RUSHABH shukla ने कहा…

bahoot bahoot dhanyavad, aur han sujata ji maa ka mahatv pahale bhi mahatvpurn tha, aj bhi hai, aur sada rahega.

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति विचारों की | आभार

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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ऋषभ शुक्ला ने कहा…

ahukriya tushar ji mai jaroor aaunga. aapako dhanyavad.