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मंगलवार, 6 जुलाई 2010

रिश्ता खून का .........लेख...........मोनिका गुप्ता

.रक्तदान महादान....रक्तदान पूजा समान ...वगैरहा .. आमतौर पर इस तरह के नारे और स्लोगन सुनने को मिल ही जाते हैं पर आखिर रक्तदान इतना जरुरी है या ऐसे ही ...

इस बात मे कोई दो राय नही है कि रक्त का कोई दूसरा विकल्प नही है यानि यह किसी फैक्टरी मे नही बनता और ना ही इंसान को जानवर का खून दिया जा सकता है ..यानि रक्त बहुत ही ज्यादा कीमती है. रक्त की मांग दिनो दिन बढ्ती ही जा रही है पर जागरुकता ना होने की वजह से लोग देने से हिचकिचाते हैं ..मसलन यह सोच कि कितने लोग तो रक्त दान करते ही हैं तो मुझे क्या जरुरत है ..या भई, मेरा ब्लड तो बहुत आम है ये तो किसी का भी होगा तो मैं ही क्यो दान करुँ. अब उनकी यह सोच सही इसलिए नही है कि आम ब्लड होने के कारण उस समूह के रोगी भी तो ज्यादा आते होगें ..यानि उस ग्रुप की मागँ भी तो उतनी ही होगी ... या फिर कई लोग यह सोचते है कि भई, मेरा ग्रुप तो रेयर है यानि खास है तो मैं तो तब ही दूगाँ जब जरुरत होगी ..ऐसे मे तो यही बात सामने आती है कि आपका रक्त् चाहे आम हो या खास .. हर तीन महीने यानि 90 दिन बाद देना ही चाहिए. हमारा शरीर 24 घंटे के भीतर रक्त ही पूर्ति कर लेता है जबकि सभी तरह की कोशिकाओ के परिपक्व होने मे 5 सप्ताह तक लग जाते हैं ..

अब बात आती है कि जब जरुरत होगी तभी देंग़ें जोकि सही नही है .. मरीज कब तक आपकी इंतजार करेगा. हो सकता है कि आप तक खबर ही ना पहुँच पाए या आप ही समय पर ना पहुँच पाए तो आप दोषी किसे मानोगें ...दूसरी बात यह भी है कि बेशक आप लगातार रक्त देते हो पर जब भी आपने रक्त दान करना होता है आपका सारा चैकअप दुबारा होता है उसमे कई बार समय भी लग जाता है ... तो इस इंतजार मे तो ना ही रहे कि जब जरुरत होगी तभी ही देने जाएगें ...

वैसे स्वैच्छिक रक्त दान को सुरक्षित माना जाता है क्योकि इन मे रक्त संचरण जनित सक्रंमण ना के बराबर होता है.

यह भी बात आती है कि रक्तदान किसलिए करें तो स्वस्थ् लोगो का नैतिक फर्ज है कि बिना किसी स्वार्थ के मानव की भलाई करें. अगर हमारे रक्त से किसी की जान बच सकती है तो हमे गर्व होना चाहिए कि हमने नेक काम किया है.

तो अगर आप 18 से 60 साल के बीच मे हैं.... आपका होमोग्लोबिन 12.5 है और आपका वजन 45 किलो से ज्यादा है .. तो आप निकट के ब्लड बैंक मे जाकर और जानकारी लेकर रक्तदान कर सकते हैं.

 क्या आपको पता है कि देश मे हर साल लगभग 80 लाख यूनिट रक्त की जरुरत होती है जबकि 50 यूनिट ही मिल पाता है. ये बहुत कम है.बेचारा मरीज रक्त की इंतजार करता है जबकि होना यह चाहिए कि रक्त मरीज ही इंतजार करे ना कि मरीज रक्त की ...जैसाकि हरियाणा के जिला सिरसा मे है. यहाँ 100% स्वैच्छिक रक्त दाता हैं और रक्त मरीज की इंतजार करता है ना कि मरीज रक्त की. इसी उपल्ब्घि को वेब साईट www.bravoblooddonor.org पर भी डाला है.
सच, जिस काम मे किसी का भला होता हो किसी की जान बचती हो उस काम से कदम पीछे नही हटाना चाहिए.
 जाते जाते एक बात तो करना भूल ही गई कि रक्तदान के बारे मे एक बात बहुत सुनने को मिलती है कि अरे .. हमें तो रक्तदान के लिए किसी ने कहा ही नही ... इसलिए हमने किया भी नही .. ऐसे लोगो के लिए क्या जवाब हो सकता है आप बेहतर जान सकते हैं. मैं तो इतना ही कहूँग़ी ..... “जब जागो तभी सवेरा” ....

........................जय रक्तदाता ......................

6 comments:

हिन्दी साहित्य मंच ने कहा…

मोनिका जी , आप लेख ज्ञानवर्धक और रोचक लगा ... यही सोच होनी चाहिये

हिन्दी साहित्य मंच ने कहा…

मोनिका जी , आप लेख ज्ञानवर्धक और रोचक लगा ... यही सोच होनी चाहिये

neeshoo ने कहा…

hum sabhi ko aisa karne ki jarurat hai

pravesh ने कहा…

aaj rakat daan bhut jaruri ho gayaa hai .kyonki bahudaa sunane me ataa hai ki rakat na milne ke kaaran mar gayaa .rakat daan karne ke liye jantaa ko jagruk karnaa bahut jaruri hai meraa to yah bhi maananaa hai ki rakat daan ke saath hi hame ang daan ke liye bhi prerit karnaa chaahiye.

बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

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