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गुरुवार, 24 जून 2010

प्‍यार.......................... प्रमेन्‍द्र

राहो मे पलके बिछा कर
तेरा इंतजार कर रहा हूँ।
अपनी चाहत को तेरे दिल मे बसा कर
अपना इश्क-ए-इज़हार कर रहा हूँ।

चाहत को अपनी चाह कर भी,
इज़हार नही कर पा रहा हूँ।
तेरी चाहत मे दिल मे दर्द लेकर
अपने को दिल को दर्द दे रहा हूं।

मै तुम्‍हे देखता हूँ
देखता ही रह जाता हूँ।
मै जहाँ जाता हूँ
सिर्फ तुझे ही पाता हूँ।।

मै अपने प्‍यार को खुद मार रहा हूँ ,
चाह कर भी कुछ नही कर पा रहा हूँ।
काश कोई करिश्‍मा हो जाये,
सारे बंधन तोड़ कर हम एक हो जाये।। - प्रमेन्द्र

4 comments:

kunwarji's ने कहा…

"काश कोई करिश्‍मा हो जाये,
सारे बंधन तोड़ कर हम एक हो जाये।।"
ye panktiya dil ko chhu gayi...
par
ye
bandhan kaise hai bhai.....jo tode jaaye...

kunwar ji,

सर्प संसार ने कहा…

हमारी भी यही दुआ है कि आपकी इच्छा पूर्ण हो जाए।
---------
क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

सुमन कुमार ने कहा…

http://kavikithali.blogspot.com/
नारी

समझना
एक नारी को
शायद........
मुश्किल ही नहीं,
असंभव है.
नारी,
आग का वह गोला है
जो जला सकती है,
पूरी दुनिया.
नारी,
पानी का सोता है
वह बुझा सकती है,
जिस्म की आग.
नारी,
एक तूफान है
वह मिटा सकती है,
आदमी का वजूद.
नारी,
वरगद की छाया है
वह देती है, थके यात्री को,
दो पल का आराम.
नारी,
एक तवा है
वह खुद जलकर मिटाती है,
दूसरों की भूख.
नारी,
पवित्र गंगा है
वह धोती है सदियों से,
पापियों का पाप.
नारी,
मृग तृष्णा है
जो पग बढ़ाते ही,
चली जाती है दूर.
नारी,
लाजबन्ती है
वह मुरझा जाती है,
छु देने के बाद.
नारी,
सृष्टी है
वह रचती है रोज,
एक नई संसार.

सुमन कुमार ने कहा…

आदमी

सुबह से शाम तक की,
भाग दोड़ में, भूल जाता है,
अपने आप को.
फैक्ट्री में काम करने वाले
मजदूरों के भीड़ में,
खो जाता है, उसका वजूद.
फिर .......
पता नहीं कब,
बचपन से जवानी
और .......
जवानी से बुढ़ापा
तक की सफ़र,
पूरा कर लेता है, आदमी.