हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

मंगलवार, 29 सितंबर 2009

गजल ..........................कवि कुलवंत जी

देख कर लोग मुझे रश्क किया करते हैं .
क्या पता उनको छुपे गम मुझमें रहते हैं .

जी लिया है लगता जिंदगी ने हमको बहुत,
हर घड़ी को अब हम बोझ समझ सहते हैं .

जिसको भी अपना समझ दिल में बसाया हमने,
चेहरा खुद का दिखाने से भी वह डरते हैं .

कितने आंसू हैं बहाए अपनों की खातिर,
अब तो आंखों से दो आंसू भी नही बहते हैं .

घाव इतने हैं दिये उसने हमें छलनी किया,
शान से फिर भी देखो अपना हमें कहते हैं .

राम हर युग में नही पैदा हैं होते लेकिन,
हर गली कूचे में रावण तो यहां रहते हैं .

4 comments:

neeshoo ने कहा…

राम हर युग में नही पैदा हैं होते लेकिन,
हर गली कूचे में रावण तो यहां रहते हैं .


ये लाईने बहुत ही सच लगी । सुन्दर गजल के लिए बधाई ।

Murari Pareek ने कहा…

bahut sundar rachanaa aaj ke yug par ekdam khari sabke dilon ka yahi haal hai pyaare!!

Acharya Kishore Ji ने कहा…

ekdum khari va sachhi rachna

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत ही सटिक लिखा है आपने

राम हर युग में नही पैदा हैं होते लेकिन,
हर गली कूचे में रावण तो यहां रहते हैं .