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शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

" निबंध प्रतियोगिता सूचना " हिन्दी दिवस पर लिखें निबंध और जीतें ५०० के इनाम

हिन्दी साहित्य मंच हिन्दी साहित्य को बढ़ावा देने हतु नियमित अन्तराल पर कविता प्रतियोगिता का आयोजन करता रहा है । हिन्दी साहित्य मंच इस बार हिन्दी दिवस को ध्यान में रखते हुए एक निबन्ध प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है । निबंध प्रतियोगिता का विषय है - " हिन्दी साहित्य का बचाव कैसे ? " । निबंध ५०० से अधिक शब्दों का नहीं होना चाहिए । हिन्दी फाण्ट यूनिकोड या क्रूर्तिदेव में ही होना चाहिए अन्यथा स्वीकार नहीं किया जायेगा । निबंध प्रतियोगिता हेतु आप अपनी प्रविष्टियां इस अंतरजाल पते पर भेंजें- hindisahityamanch@gmail.com. प्रतियोगिता की अन्तिम तिथि है १३ सितंबर निर्धारित है । इसके बाद की प्रविष्टियां नहीं स्वीकार होगी । प्रतिभागी अपना स्थायी पता और संपर्क सूत्र अवश्य ही दें । विजताओं की घोषणा १४ सितंबर की शाम को की जायेगी । विजेता को एक प्रशस्ति पत्र और ५००, ३०० और २०० का इनाम दिया जायेगा । संचालक ( हिन्दी साहित्य मंच )

गुरुवार, 27 अगस्त 2009

"प्लेटफार्म पर भटकता बचपन"

उसके पापा की साइकिल मरम्मत की दुकान थी, आमदनी ज्यादा नही थी, सो पापा ने उसे बनारसी साङियो की एक फैक्टरी मे काम करने भेजा ,तब वह महज ८-९ साल के था।छोटा होने की वजह से हाथो की पकङ मजबूत नही थी, नतीजन साङी मे दाग छुट गया , इस बात पर गुस्साये ठेकेदार ने उस की पिटाई की। वह पापा के पास जा पहुचा ,पर पापा ने उस की बात नही सूनि और उन्होने भी उस की पिटाई की, फिर उसे जबरजस्ती उसी ठेकेदार के पास पहुचा दिया गया ,ठेकेदार ने उसे दोबारा पिटा , पर अब वह घर नही गया वह सिधा जा पहुचा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ।यहा से शुरु होती है उसके आगे की कहानी जब वह स्टेशनपहुचा तब वह वहा सो गया ,जब आखँ खुली तब भुख लगी थीऔर सवेरा हो चूका था ,पेट मे चुहे दैङ रहे थे खाने के लिये पास मे कुछ भी नही था और न ही कुछ खरीद पाने के लिये पैसे, वह असहाय भुख सेतङप रहा था, अचानक उसकी नजर कुछ ऐसे बच्चो पे पङी जो कुङे के डब्बे से कुछ निकालने की कोशीश मे लगे थे ,वह वहा गया तो उसने देखा की वे बच्चे कुङे से कुछ खाने की वस्तुवे निकाल रहे थे , तब वह वँहा गया और वह भी उन बच्चो के गिरोह मे सामील हो गया और उसने भी उन जुठे खाने से अपने पेट की आग को बुझाई । वह उन बच्चो के गिरोह मे शामील हुआ जो पल्टेफार्म पर भीख मांगने से लेकर पानी के डब्बो को बेचना, नशे की वस्तुवो को बेचना ,प्लेटफार्म पे पोछा लगाने आदि कई ऐसे काम करते हैं जो की प्रशासन की नजर मे गैर कानुनी हैं। ये कहानी किसी एक विषेश कि नही है हम और आप प्रतिदीन इन बच्चो को देखते है फिर कुछ सोचते और फिर भुल जाते है। आपको जान कर हैरानी होगी की इनमे से ज्यातर बच्चे ऐसे है जो नशे की गिरफ्त मे बुरी तरह से जकङे जा चुके है। नशे के व्यापारी अपने थोङे से फायदे के लिये उन बच्चो के भविश्य के साथ खेल रहे है जिन्हे भारत का भविश्य कहा जा रहा है।कानून है कि १८ साल से कम उम्र का बच्चा न तो नशे का सेवन कर सकता है और न ही उसे बेच सकता है , लेकीन हमारा प्रशासन है की जिसे इसकी खबर ही नही है । बाल अधिकारो से जुङी तमाम गैरसरकारी संस्था को चाहिये की नशे की ओर इनके बढते हुये कदम को रोका जाये और इनके कदम को भारत के उज्वल भविश्य कि ओर अग्रसर किया जाये।