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शनिवार, 31 जुलाई 2010

प्‍यार

तुम पास होती,
ये जरूरी नही था।
तुम्‍हारे होने का एहसास ही,
जीने के लिये काफी था ।।
मै तेरे बिना भी जी सकता था,
पर तेरी बेवफाई न मुझे मार डाला।
मुझे मालून भी न चला,
तुने एक पल मे प्‍यार बदल डाला।।
न चाह थी तेरे आलिंगन की,
न चाह थी तेरे यौवन का।
दिल की आस यही रही हमें,
प्‍यार अमर रहे हमेशा।।
मैने प्‍यार में चाहा खुद्दारी,
पर मिली हमेशा गद्दारी।
प्‍यार कोई दो जिस्‍मो खेल नही है,
प्‍यार दो दिलो का मेल है।।
मेरे प्‍यार की सीमा वासना नही,
ये तो अर्न्‍तत्‍मा का मिलन है।
पल भर पहले दो अजनबियों का,
जीवन भर साथ निभाने का वचन है।।
मै तुम्‍हारा ही हूँ और रहूँगा,
मैने तुमको वचन दिया था।
तुमने भी ऐसा ही प्रण लिया था,
पर आज तुम्‍हारा प्रण दम तोड़ दिया।।
बदलते परिवेश मे
प्‍यार की परिभाषा ही बदल गई।
वर्तमान आधुनिकता में,
प्यार की जगह वासना ने ले ली है।।
तुमसे मिलने के बाद सोचा था‍
कि मेरी सच्‍चे प्‍यार की तलाश खत्‍म हुई।
पर नही अभी प्‍यार की ठोकरें बाकी है,
प्‍यार के लिये अभी और परीक्षा बाकी है।।
तुम मेरी अन्तिम आस नही हो,
अभी प्‍यार करने वाले और भी है।
जिनने अन्‍दर प्‍यार के नाम पर वासना ही प्‍यास नही
बल्कि प्‍यार की गइराईयों मे डूबकर "प्रेम रसपान" की इच्‍छा हो।- प्रमेन्द्र 

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

गोबिंद गोबिंद नाम उचारो...........(सवैया).................डा श्याम गुप्त

सीस वही जो झुकैं चरनन, नित राधा-गोबिन्द सरूप सदा जो |
नैन वही जो लखें नित श्याम, वही शुचि सांवरो रूप लला को.|
कान वही जो सुनै धुनी मुरली, बजाई धरे सिर मोर पखा जो |
तन तौ वही जो निछावर होय,धरे हिये रूप वा ऊधो सखा को |

हाथ वही जो जुड़ें हर्षित मन , देखिकें लीला जो गौ दोहन की |
पैर वही जो कोस चौरासी , चलें परिकम्मा में गिरि गोधन की |
ध्यान वही जो रमई नित प्रति, मनमोहिनी वा छवि में सोहन की |
श्याम है मन तौ वही मन ही मन मुग्ध मुरलिया पै मनमोहन की |

गलियाँ वही व्रज की गलियाँ ,जहँ धूलि में लोटे कृष्ण मुरारी |
वन तौ वही वृन्दावन 'श्याम , बसें जहँ राधिका-रास बिहारी |
ताल वही जहँ चीर हरे, दई गोपीन कों सुचि सीख सुखारी |
चीर वही जो बढाए सखा,सखि द्रुपद सुता हो आर्त पुकारी |

बैन वही जो उचारै सदा, वही गोबिंद नाम भजै जग सारो |
रसना वही रस धार बहाय,भाजी जेहि गोबिंद नाम पियारो |
भक्ति वही गजराज करी,परे दुःख में गोबिंद काज संभारो |
श्याम, वही नर गोविद गोविन्द, गोबिंद ,गोविन्द नाम उचारो ||