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बुधवार, 22 अप्रैल 2009

नया जीवन


टकटकी बाँधकर देखती है

जैसे कुछ कहना हो

और फुर्र हो जाती है तुरन्त

फिर लौटती है

चोंच में तिनके लिए

अब तो कदमों के पास

आकर बैठने लगी है

आज उसके घोंसले में दिखे

दो छोटे-छोटे अंडे

कुर्सी पर बैठा रहता हूँ

पता नहीं कहाँ से आकर

कुर्सी के हत्थे पर बैठ जाती है

शायद कुछ कहना चाहती है

फिर फुर्र से उड़कर

घोंसले में चली जाती है
सुबह नींद खुलती है

चूँ...चूँ ...चूँ..... की आवाज

यानी दो नये जीवनों का आरंभ

खिड़कियाँ खोलता हूँ

उसकी चमक भरी आँखों से

आँखें टकराती हैं

फिर चूँ....चूँ....चूँ...!!!
कृष्ण कुमार यादव

सोमवार, 20 अप्रैल 2009

माँ की फरियाद.


ब्च्चो मै हूं तुम्हारी दादी मेरा नाम है आजादी,
अपनी फरियाद सुनाने आई हूं,मैं तुम्हें जगाने आई हूं,
जब देशभक्त परवानों ने आजादी के दिवानों ने,
दुशमन से मुझे छुडाया था तो अपना लहू बहाया था,
मुझे अपने बेटों को समर्पित कर वो चले गये,
कुछ ही वर्शों में मेरे बेटे भी बदल गये,
देश को बोटी बोटी कर खा रहे हैं, मुझे पतिता बना रहे हैं,
अपना हाल सुनाने आई हूं, मै तुम्हें जगाने आई हूं
बडे बडे नेता अधिकारी बन गये हैं,
सिर से पाँव तक भृ्श्टाचार में सन गये हैं,
संविधान की धज्जियां उडा रहे हैं,
स्वयं हित भाई से भाई लडा रहे हैं,
वीरों की कुर्वानी भूल गये हैं,
आदर्श इतिहास सब धूल गये हैं,
इनके घोटालों का बसता भारी है,
कोने कोने मे शड्यंन्त्रकारी है,
देश की ताजा तस्वीर दिखाने आई हूँ, मैं तुम्हें ज्गाने आई हूँ.
बच्चो ये भारत देश तुम्हारा है,
इस पर अब हक तुम्हारा है,
तुम्हारे अविभावक कर देंगे इसे निलाम,
तुम फिर से बन जाओगे गुलाम,
अपनी संस्कृ्ति को तुम पेह्चान लो,
अपने कर्तव्य को भी जान लो,
इन भृ्श्टाचारियों से देश बचाओ,
प्यार से ना माने तो अर्जुन बन जाओ,
तुम्हे़ खबर्दार बनाने आई हूं, मैं तुम्हें जगाने आई हूँ