
मगर आँख में नीर है
जिसकी चाहत वही दूर में
कैसी यह तकदीर है
मिल न पाते मिलकर के भी
किया लाख तदबीर है
लोक लाज की मजबूती से
हाथों में जंजीर है
दिल की बातें कहना मुश्किल
परम्परा शमसीर है
प्रेम परस्पर न हो दिल में
व्यर्थ सभी तकरीर है
पी कर दर्द खुशी चेहरे पर
यही सुमन तस्वीर है
Mijhe kushee hai aise kavita padhkar.
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Hindi Sahitya
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