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गुरुवार, 10 जून 2010

दोस्त की बेटी के जन्म पर एक कविता -------- कवि दीपक शर्मा

सेमल जैसी काया लेकर देखो चंदा आया रे 
रौशन जगमग मेरे अंगना देखो उतरा साया रे 
पूनो वाली ,रात अमावास जैसी लगती दुनिया को  
चांदनी मेरे द्वारे आई ,छाया जग मे उजियारा रे .
 
दूध कटोरे माफिक आंखिया,बिन बोले कह देती बतिया 
रात बने दिन जगते जगते ,दिन भये सोते सोते रतिया
मुंह से दूध की लार गिरे तो मां ने हाथ फैलाया रे 
चांदनी मेरे द्वारे आई ,छाया जग मे उजियारा रे .

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