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रविवार, 9 मई 2010

माँ..........(कविता)........श्यामल सुमन











मेरे गीतों में तू मेरे ख्वाबों में तू,
इक हकीकत भी हो और किताबों में तू।
तू ही तू है मेरी जिन्दगी।
क्या करूँ माँ तेरी बन्दगी।।

तू न होती तो फिर मेरी दुनिया कहाँ?
तेरे होने से मैंने ये देखा जहाँ।
कष्ट लाखों सहे तुमने मेरे लिए,
और सिखाया कला जी सकूँ मैं यहाँ।
प्यार की झिरकियाँ और कभी दिल्लगी।
क्या करूँ माँ तेरी बन्दगी।।

तेरी ममता मिली मैं जिया छाँव में।
वही ममता बिलखती अभी गाँव में।
काटकर के कलेजा वो माँ का गिरा,
आह निकली उधर, क्या लगी पाँव में?
तेरी गहराइयों में मिली सादगी।
क्या करूँ माँ तेरी बन्दगी।।

गोद तेरी मिले है ये चाहत मेरी।
दूर तुमसे हूँ शायद ये किस्मत मेरी।
है सुमन का नमन माँ हृदय से तुझे,
सदा सुमिरूँ तुझे हो ये आदत मेरी।
बढ़े अच्छाईयाँ दूर हो गन्दगी।
क्या करूँ माँ तेरी बन्दगी।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. माँ पर बहुत ही प्यारी कविता ...वैसे भी हम सभी माँ के बारे में जितना भी लिखें या कहें वो कम ही होगा ..

    जवाब देंहटाएं
  2. इक हकीकत भी हो और किताबों में तू।
    तू ही तू है मेरी जिन्दगी।
    क्या करूँ माँ तेरी बन्दगी।।

    सर जी माँ पर केन्द्रित कविता बहुत ही अच्छी बनी है ....बधाई

    जवाब देंहटाएं
  3. गोद तेरी मिले है ये चाहत मेरी।
    दूर तुमसे हूँ शायद ये किस्मत मेरी।

    maa ko naman ...sundar kavita .khas kar ye line..dhanyavaad

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

    माँ तुझे सलाम

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर रचना...मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत खूबसूरत शब्दो मे पिरोया गया है कविता ...को .बधाई ...मैं माँ के बारे मे हमेशा एक ही बात कहती हूँ ....उसको नही देखा हमने कभी पर उसकी जरुरत क्या होगी .ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी ... मोनिका गुप्ता

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  7. This poem is of kavi deepak sharma taken from his book Falakditpti.Why are you giving name of Shyamal suman.Please correct this.
    Kavyadhara Team

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  8. बेनामी जी - पता नहीं आपने ये क्या कह दिया? मैंने आजतक यह गलती नहीं की है कि किसी दूसे की रचना को अपनी रचना बताऊँ। यहाँ तक कि मैं अपनी टिप्पणी में भी यदि रचनाकार का नाम मालूम है तो उसका जिक्र कर देता हूँ। कुछ प्रमाण हो तो बतायें। इस तरह की फलतू टिप्पणियों से आप किसी रचनाकार को दुख पहुँचाने के अलावा और कर ही क्या सकते हैं। खैर ------ भगवान आपका भला करे।

    शेष टिप्पणीकारों के लिए - आप सबने जो इतना प्यार और सम्मान दिया - मैं अपना हार्दिक आभार प्रेषित करना चाहता हूँ। सदा स्नेह बनाये रखें।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  9. suman ji
    aap gaur se padhe to behtar hai. kavita ke upar ka shirshak kavi deepak sharma ji ka hai. jo is site par 9 tarikh ko chapi thi aur sahitya shilpi par bhi chapi hai. aap chaahe to dekh sakte hai.
    neeche me kavita ki copy bhej rahi hoon. kripya site admin se kahe ki is takniki bhool ko theek karen.


    “उसकी आवाज़ बता देती हैं मैं कहाँ हूँ ग़लत
    मेरी माँ के समझाने की कुछ अदा निराली है .”


    आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म मे इसी माँ की कोख़ से पैदा करना ..हमारा जीवन इसी गोद मे सार्थक हैं. हमारा बचपन इसी ममता का प्यासा हैं और जन्मो -जन्मान्तर तक हम इसी ममत्व का नेह्पान करते रहें ..माँ आप हमारा प्रणाम स्वीकार करो और हमे आशीर्वाद दो .
    आज फिर नेह से हाथ सिर पर फेर माँ
    हूँ बहुत टूटा हुआ , बिखरा हुआ , घायल निराश
    मरू - भूमि में भटके पथिक- सा , लिप्त दुःख में हताश
    है प्रेम को प्यासा ह्रदय , व्याकुल स्वाभाव ठिठोल को
    अपनत्व को आकुल है मन, जीवन दो म्रदु बोल को .
    बोल जिनको सुनकर मेरा , नयन नीर भी मुस्कुराये
    आज फिर उस नेह से नाम मेरा टेर माँ .

    छोड़ आया मैं बहुत दूर , अपना चंचल , मधुर बचपन
    जग की बाधाओं में उलझा, है मेरा अभिशाप यौवन
    गोद में तेरी रखे सिर , काल कितना बीत गया
    कितने युग से किया नहीं, तेरे इस आँचल में क्रंदन
    पीर जब तक बह न जाये, आंसुओं में मन की सारी
    तब तक आँचल में छुपा रख, हो जाये कितनी देर माँ .

    पीर जो शैशव में देता था मुझे दंड तेरा
    सोच अब बातें वही मुस्कुराते हैं अधर
    बाद में दुःख से तेरे भी नम नयन हो जाते थे
    याद कर बातें वही , अब भर आती मेरी नज़र
    उम्र भर हँसता रहे , हर रक्त बिंदु मेरे तन का
    इतनी ममता से सरोवर, मुझको कर अबकी बेर माँ

    All right reserved @ दीपक शर्मा
    Kavi Deepak Sharma
    http://www.kavideepaksharma.com

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  10. mere paas yeh pustak hai aur maine padaha hai ise.yeh maine kavi ke blog se cut & paste kiya hai .aap chaahe to use wahan bigadda me dekh sakte hain
    aap apna bhala kar le .humara to prabhu kar raha hai.

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  11. श्यामल जी की कविता में कवि दीपक शर्मा द्वारा लिखा कुछ अंश प्रकाशित हो गया था ...इस गलती के लिए हिंदी साहित्य मंच जिम्मेदार है ...किसी भी तरह का विवाद न हो इसके लिए हिंदी साहित्य मंच से विवादित सामग्री हटा दी गयी है ...उपरोक्त गलती के लिए हिंदी साहित्य मंच छमा चाहता है ...
    संचालक
    हिंदी साहित्य मंच

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  12. चलिए असल भूल कहाँ से हुई - इसका पता चल गया - धन्यवाद बेनामी जी।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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