Pages - Menu

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

क्या है .....(ग़ज़ल)....मृतुन्जय जी

डर
,संशय ,बेचैनी क्या है 

हर
दिल में पुश्तैनी क्या है 

खूनों
के सौदागर पूछें 

साखी,
शबद ,रमैनी क्या है 

नदियां
सबकी आंखों में हैं 

गंग,
जमुन ,तिरवेनी क्या है 

दिल
को दिल से मिल जाने दो 

आरी
,चाकू ,छैनी क्या है 

सब
तो उसके ही बंदे हैं 

हिन्दू
,मुस्लिम, जैनी क्या है

3 टिप्‍पणियां:

  1. डर
    ,संशय ,बेचैनी क्या है

    हर
    दिल में पुश्तैनी क्या है

    dil ko tak utar gayi gazal

    जवाब देंहटाएं
  2. खूनों
    के सौदागर पूछें

    साखी,
    शबद ,रमैनी क्या है

    behad khubsurat sher hua hai ......

    जवाब देंहटाएं
  3. .

    खूनों के सौदागरों को क्या पता--- साखी सबद रमैनी, अधिकतर लोगों को नहीं पता;
    --वाह ! क्या बात है, शानदार ,शुद्ध गज़ल, बधाई

    जवाब देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रियाएं हमारे मार्गदर्शन हेतु आवश्यक है । आप अपने विचारों को बेबाकी से कहें । आपके सुझाव आमंत्रित है।