Pages - Menu

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2009

यूँ ही उदास है दिल--------जतिन्दर परवाज़

यूँ ही उदास है दिल बेकरार थोड़ी है


मुझे किसी का कोई इंतजार थोड़ी है


नजर मिला के भी तुम से गिला करूँ कैसे


तुम्हारे दिल पे मेरा इख़्तियार थोड़ी है


मुझे भी नींद न आए उसे भी चैन न हो


हमारे बीच भला इतना प्यार थोड़ी है


ख़िज़ा ही ढूंडती रहती है दर-ब-दर मुझको


मेरी तलाश मैं पागल बहार थोड़ी है


न जाने कौन यहाँ सांप बन के डस जाए


यहाँ किसी का कोई ऐतबार थोड़ी है

4 टिप्‍पणियां:

  1. यहाँ किसी का ऐतबार थोड़ी है । बहुत खुब कहा परवाज जी आपने

    जवाब देंहटाएं
  2. यूँ ही उदास है दिल बेकरार थोड़ी है





    मुझे किसी का कोई इंतजार थोड़ी है




    नजर मिला के भी तुम से गिला करूँ कैसे




    तुम्हारे दिल पे मेरा इख़्तियार थोड़ी है


    bahut khub

    जवाब देंहटाएं
  3. सर्जनात्मकता उजागर होती ही है ... ...

    जवाब देंहटाएं

आपकी प्रतिक्रियाएं हमारे मार्गदर्शन हेतु आवश्यक है । आप अपने विचारों को बेबाकी से कहें । आपके सुझाव आमंत्रित है।