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मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

आज का प्रेम

मनुष्य (इस संसार का सबसे अद्भुत प्राणी),
जिसका प्रेम प्रत्येक छण !
कलेंडर से जल्दी बदलता है,
और समय से भी तेज चलता है !!

औरत (संसार की सबसे रहस्यमय प्रजाती),
को देखते ही प्रेम में पड़ जाता है !
और फिर जनसंख्या और महंगाई,
से भी तेज बढता जाता है !!

पहले ही दिन अट्रैक्सन होता है,
फिर कनेक्सन होता है !
दूसरे ही दिन कन्वेंसन होता है,
और अंत में इस प्रेम नामक दवा,
की एक्सपायरी डेट ख़त्म हो जाती है !!

और फिर मनुष्य (मोबाईल फोन),
से औरत नामक सीम निकाल दी जाती है !
और फिर सस्ती, टिकाऊ  और सुन्दर ऑफर,
वाले सिम (महिला) की तलाश शुरू हो जाती है !!

और कभी - कभी तो यह,
'शादी' नामक ज्वार तक पहुँच जाती है !
और फिर 'तलाक' नामक भाटा पर,
आकर ख़त्म होती है !!

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (09-04-2014) को चुनाव की नाव, पब्लिक का लक; चर्चा मंच 1577 में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हास्य-व्यंग्य के सशक्त आयाम
    अलबेला खत्री का असमय में जाना
    जमीन से जुड़े एक महान कलाकार का जाना है...
    चर्चा मंच परिवार की ओर से भाव भीनी श्रद्धांजलि।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपका बहुत - बहुत आभार, मेरी रचना को यहाँ स्थान देने के लिए, और साहित्य जगत के सितारे और अपनी हास्य कविता से सबका दिल जितने वाले महान कवि अलबेला खत्रीे जी को मेरी ओर से हार्दिक श्रद्धांजली.

    जवाब देंहटाएं
  3. मेरी रचना " नारी (एक बेबसी)" जो मेरे ब्लॉग "कविता संग्रह" पर पोस्ट है और जिसका लिंक है - http://rishabhpoem.blogspot.in/
    १३ अप्रैल को यह रचना " नयी पुरानी हलचल '' पर प्रकाशित की जाएगी. आप सभी से अनुरोध है की आप सभी वह जाकर मेरी रचना को पढ़े और अपने विचार व्यक्त करें.
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in/

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