Pages - Menu

शनिवार, 5 मार्च 2011

मेरा जीवन तो शबनम है----(गजल)---श्यामल सुमन

सूरत पे आँखें हरदम है
तेरे भीतर कितना गम है

निकलो घर से, बाहर देखो
प्रायः सबकी आँखें नम है

समझ सका दुनिया को जितना
मेरा गम कितनों से कम है

जितना तेज धधकता सूरज
दुनिया में उतना ही तम है

मुझको चाहत नहीं मलय की
मेरा जीवन तो शबनम है

सब मिलकर के चोट करोगे?
क्योंकि लोहा अभी गरम है

होश में सारे परिवर्तन हों
सुमन के भीतर में संयम है