चेहरे से साफ झलकता है इरादा क्या है
सच छुपाने के लिये देखिये कहता क्या है
जैसे इन्सान में अहसास नहीं बाकी आज
किस घडी कौन बदल जाये भरोसा क्या है
फूलों से खुशबू महकती नहीं पहले जैसी
सोचिये अपनी मशीनों से निकलता क्या है
प्यार की चाह की ओर चैन गंवाया हमने
दिल लगाने का बताईये नतीजा क्या है
सामने पाके मुझे आप ठहर जाते हो
सच बताओ कि मेरा आपसे रिश्ता क्या है
उम्दा ग़ज़ल कही जनाब !
जवाब देंहटाएंआदाब
बहुत सुन्दर भावपूर्ण ग़ज़ल .बधाई
जवाब देंहटाएंवह दिन खुदा करे कि तुझे आजमायें हम
" bahut hi umda ..."
जवाब देंहटाएंwaqt mile to yahan par bhi aaiyega sir ,
" अकल के मोटे ..दिमाग के लोटे : पप्पू धमाल (व्यंग)
http://eksacchai.blogspot.com/2011/08/blog-post_18.html
वाह, बेहतरीन।
जवाब देंहटाएंकल-शनिवार 20 अगस्त 2011 को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया अवश्य पधारें.आभार.
जवाब देंहटाएंअच्छी गज़ल
जवाब देंहटाएंबढ़िया ग़ज़ल का उम्दा शेर...
जवाब देंहटाएंजैसे इन्सान में अहसास नहीं बाकी आज
किस घडी कौन बदल जाये भरोसा क्या है
धन्यवाद :)
आप सभी लोगों का तहे-दिल से धन्यवाद
जवाब देंहटाएंसूबे सिहं सुजान
मुझे फेसबुक पर पढें
जवाब देंहटाएंhttp://www.facebook.com/सुजान कवि
bahut sunder rachana. khas ker ye lines..
जवाब देंहटाएंसामने पाके मुझे आप ठहर जाते हो
सच बताओ कि मेरा आपसे रिश्ता क्या है
anita ji thanks
जवाब देंहटाएंsabhi ka shukriya
जवाब देंहटाएंpyar ab bhacha hi khan hai ..aachi gazal hai ..
जवाब देंहटाएंसुनिता जी शुक्रिया..............
जवाब देंहटाएंहर जगह तेरी ही तस्वीर दिखाई दी है
जवाब देंहटाएंजिससे बोलूं तेरी आवाज सुनाई दी है
जी ,, दादी पर गजल पढें
जवाब देंहटाएंदोस्तो, आज मुझे मोटरसाईकिल पर चोट लग गई,कुछ बच्चे साईकिल पर जा रहे थे अचानक साईकिल आगे आ गई जिससे मुझे ब्रेक लगानी पडी और स्लीप होने से बुरी तरह से कमीज फटा था
जवाब देंहटाएंलेकिन लोगों की संवेदना बिल्कुल मरी हुई देखने को मिली,किसी ने रूक कर पूछा नही
किसी मित्र ने टिप्पणी की बेनामी से.......जिससे मुझे अपनी पुरानी पोस्ट याद आई ,उस बेनामी व्यक्ति को प्रणाम.....और मैं सभी टिप्पणीकर्ता मित्रों का आभार....
जवाब देंहटाएंसभी का सहृदयता से धन्यवाद
जवाब देंहटाएंthanks my readers
जवाब देंहटाएंAlbelaKhatri.com.....
जवाब देंहटाएंअलबेला जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपकी नवाजिश ए करम हम पर पडते रहें। आपसे सहयोग मांगता हूं कि हमें भी संवार दें। कुछ तो प्यार दें।।
शालिनी कौशिक , जी आपकी इनायते नज़र का शुक्रिया।।।
जवाब देंहटाएंएक आज का नया शेर ही पेशे खिदमत करता हूँ।।
जो हुई हों गल्तियाँ हमसे तो मेरे दोस्तो, हम उतारें पगडियाँ हमको मुआ़फी चाहिये।।
प्रवीण पाण्डेय , जी नमस्कार आपकी, हाजिरी, हमारी किस्मत में एक नया पल जोडती है।
जवाब देंहटाएंजो हुई हों गल्तियाँ हमसे तो मेरे दोस्तो, हम उतारें पगडियाँ हमको मुआ़फी चाहिये।।
अनुपमा त्रिपाठी, जी आपका धन्यवाद है।
जवाब देंहटाएंमुझको आपकी दी हुी टिप्पणी याद है।।
फिर से आइये, स्वागत करते हैं। कुछ नये सुझाव दीजिये।।।
जो हुई हों गल्तियाँ हमसे तो मेरे दोस्तो, हम उतारें पगडियाँ हमको मुआ़फी चाहिये।।
what is coach factory>>??????
जवाब देंहटाएंwhats this comments
आप सब मित्रों का बहुत बहुत शुक्रिया...कि ग़ज़ल पर टिप्पणी करते रहे।
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