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गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

अंतिम विदाई-----(कविता) -- मीना मौर्या

धरा पर अवतिरत हुआ
लिपटा मोह माया में भाई
आज खुशी मना लो
कल होगी अंतिम विदाई ।

खुशियों का बसेरा छोटा
जीवन पहाड़ व रवाई
सुख-समृद्धि धन दौलत
खोयेगा बचेगा एक पाई ।

मानव मन परिवर्तन शील
स्थिर टिक नहीं पाई
वर्तमान तेरा अच्छा है
मत सोच भविष्य होगा भाई ।

अकेला चिराग देगा रोशनी
संसार अंधेरा कुआ राही
चिकने डगर पर गड्ढे हैं
शूल अनगिनत न देत दिखाई ।

टुक-टुक मत देख तस्वीर
सामने बुढापा जीवन बनी दवाई
शुरुआत तो अच्छी थी
अन्त बड़ा ही दुःखदाई।।

इन्द्र धनुष रंग जीवन
सब रंग न देत दिखाई
सजीला तन बना लचीला
सास लेना दुःखदाई ।

वास्तविकता विपरित इसके है
मानव मन आये चतुराई
स्वयं संसार में नाम कर
इतिहास बना ले अंतिम विदाई । ।

10 टिप्‍पणियां:

  1. गजब का मनोभाव समेटे लाजवाब रचना लगी, बधाई आपको ।

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  2. hindi apni matr bhasha hai
    iska saman krna hr hinustani ke lie gorv ki bat hai

    जवाब देंहटाएं
  3. Bhoutikta se adhyatam ki udaan pe le jaane wali abhivyakti ! or vo bhi bhoutikta ke daur me. good work keep it up.

    जवाब देंहटाएं

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