आओ सुहाना गीत हम गाये।
नव वर्ष का आमंत्रण फिर कर,
नया ताजगी, नव स्फुर्ति पाये।
संकल्प ले हम आज धरा पर,
सुंदर सा नया संसार बसाये।
भूला दे कटुता, वैर तज कर,
बस प्यार की पावन गंगा बहाये।
सुमनों की कोमलता चुन कर,
नव स्वप्नों से जीवन बुन कर,
सरिता की कल कल का शोर,
फिर डुबा सूरज हुआ है भोर।
फिर स्वर में सुर ताल सजा कर,
जीवन का नवगीत हम गाये।
नभ में तारे जगमग जगमग,
हर्षित है धरा, प्रकाशित है नभ।
चाँद सजा है आसमान पर,
जीवन ज्योत भी हम आज जलाये।
नूतन वर्ष की सौम्य पटल पर,
आओ सुहाना गीत हम गाये।

नव वर्ष सबों को समस्त अभीष्ट प्राप्ति की सामर्थ्य तथा शुभ-मात्र की एषणा के विवेक से परिपूर्ण रखे.
जवाब देंहटाएंहार्दिक शुभकामनाएँ.
के एस एस कन्हैया बोकारो
http://ksskanhaiya.blogspot.com/
नव वर्ष की आपको और आपके पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंफिर स्वर में सुर ताल सजा कर,
जवाब देंहटाएंजीवन का नवगीत हम गाये।
बहुत सुंदर भाव ..जीवन में सुर और ताल का संगम हो तो जीवन की के कहना ..बहुत खूब
नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ......स्वीकार करें ..
सुन्दर भावों से सजी अच्छी रचना ...
जवाब देंहटाएंनव वर्ष की शुभकामनाएँ
आशाओं का गीत सुहाना।
जवाब देंहटाएंनव वर्ष की आपको और आपके पूरे परिवार को हार्दिक
जवाब देंहटाएंसुन्दर गीत.
जवाब देंहटाएंनये वर्ष की असीम शुभकामनाएं.