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गुरुवार, 26 अगस्त 2010

"कोई हो ऐसा" {कविता} ---वंदना गुप्ता

कभी कभी हम चाहते हैं कि
कोई हो ऐसा जो
हमारे रूह की
अंतरतम गहराइयों में छिपी
हमारे मन की हर
गहराई को जाने
कभी कभी हम चाहते हैं कि
कोई हो ऐसा जो
सिर्फ़ हमें चाहे
हमारे अन्दर छिपे
उस अंतर्मन को चाहे
जहाँ किसी की पैठ न हो
कभी कभी हम चाहते हैं कि
कोई हो ऐसा जो
हमें जाने हमें पहचाने
हमारे हर दर्द को
हम तक पहुँचने से पहले
उसके हर अहसास से
गुजर जाए
कभी कभी हम चाहते हैं कि
कोई हो ऐसा जो
बिना कहे हमारी हर बात जाने
हर बात समझे
जहाँ शब्द भी खामोश हो जायें
सिर्फ़ वो सुने और समझे
इस मन के गहरे सागर में
उठती हर हिलोर को
हर तूफ़ान को
और बिना बोले
बिना कुछ कहे वो
हमें हम से चुरा ले
हमें हम से ज्यादा जान ले
हमें हम से ज्यादा चाहे
कभी कभी हम चाहते हैं
कोई हो ऐसा.......कोई हो ऐसा
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5 टिप्‍पणियां:

  1. कभी कभी हम चाहते हैं कि
    कोई हो ऐसा जो
    बिना कहे हमारी हर बात जाने
    हर बात समझे
    जहाँ शब्द भी खामोश हो जायें
    सिर्फ़ वो सुने और समझे..
    बिलकुल सही ! बहुत ही सुन्दर और शानदार रचना ! बधाई!

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  2. कोई हो ऐसा जो
    बिना कहे हमारी हर बात जाने
    हर बात समझे
    जहाँ शब्द भी खामोश हो जायें
    सिर्फ़ वो सुने और समझे
    इस मन के गहरे सागर में
    उठती हर हिलोर को
    हर तूफ़ान को
    और बिना बोले
    बिना कुछ कहे वो
    हमें हम से चुरा ले

    बहुत खूबसूरती से लिखे एहसास ... सुन्दर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  3. वंदना जी,

    आपकी यह रचना बहुत अच्छी है।
    बधाई हो आपको।

    डॉ.ओ.पी.वर्मा

    जवाब देंहटाएं

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