बात सचमुच में निराली हो गईं
अब नसीहत यार गाली हो गई
ये असर हम पर हुआ इस दौर का
भावना दिल की मवाली हो गई
डाल दीं भूखे को जिसमें रोटियां
वो समझ पूजा की थाली हो गई
तय किया चलना जुदा जब भीड़ से
हर नज़र देखा, सवाली हो गयी
कैद का इतना मज़ा मत लीजिये
रो पड़ेंगे, गर बहाली हो गयी
थी अमावस सी हमारी ज़िन्दगी
मिल गये तुम, तो दिवाली हो गयी
हाथ में क़ातिल के ‘‘नीरज’’ फूल है
बात अब घबराने वाली हो गई
नीरज जी .....बहुत ही सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंडाल दीं भूखे को जिसमें रोटियां
जवाब देंहटाएंवो समझ पूजा की थाली हो गई
कितनी खूबसूरत बात है..
बात सचमुच में निराली हो गईं
जवाब देंहटाएंअब नसीहत यार गाली हो गई
और-
तय किया चलना जुदा जब भीड़ से
हर नज़र देखा, सवाली हो गयी
बहुत सुन्दर गज़ल.
vaah! aur fir Vaah!
जवाब देंहटाएंथी अमावस सी हमारी ज़िन्दगी
जवाब देंहटाएंमिल गये तुम, तो दिवाली हो गयी
वाह!
पहले पढ़ी है। आज भी वाह वाह।
जवाब देंहटाएंपहले पढी है मगर बार बार पढ कर भी दोबारा पढने को मन करता है। लाजवाब गज़ल के लिये नीरज जी को बधाई।
जवाब देंहटाएंbat sachmuch mein nirali ho gayee
जवाब देंहटाएंab nasihat yar gali ho gayee
yathartha anubhavi satya bahut badiya
bahtarin gazal ke liye mubarkbad
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