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बुधवार, 5 मई 2010

किरदार.......श्यामल सुमन जी

बाँटी हो जिसने तीरगी उसकी है बन्दगी।
हर रोज नयी बात सिखाती है जिन्दगी।।

क्या फर्क रहनुमा और कातिल में है यारो।
हो सामने दोनों तो लजाती है जिन्दगी।। 

लो छिन गए खिलौने बचपन भी लुट गया।
है बोझ किताबों का दबाती है जिन्दगी।। 

है वोट अपनी लाठी क्यों भैंस है उनकी।
क्या चाल सियासत की पढ़ाती है जिन्दगी।। 

गिनती में सिमटी औरत पर होश है किसे।
महिला दिवस मना के बढ़ाती है जिन्दगी।।

किरदार चौथे खम्भे का हाथी के दाँत सा।
क्यों असलियत छुपा के दिखाती है जिन्दगी।।

देखो सुमन की खुदकुशी टूटा जो डाल से।
रंगीनियाँ कागज की सजाती है जिन्दगी।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. किरदार चौथे खम्भे का हाथी के दाँत सा।
    क्यों असलियत छुपा के दिखाती है जिन्दगी।।
    बेहद खूबसूरत

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  2. बाँटी हो जिसने तीरगी उसकी है बन्दगी।
    हर रोज नयी बात सिखाती है जिन्दगी।।

    bahut hi khubsurat ......

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  3. ek ek sher bahut hi shandaar laga sir ji
    ye line to jajawab lagi
    बाँटी हो जिसने तीरगी उसकी है बन्दगी।
    हर रोज नयी बात सिखाती है जिन्दगी।।

    जवाब देंहटाएं
  4. श्यामल जी , बहुत ही अच्छी प्रस्तुति रही आपकी ...शब्द बहुत ही सरल और असरदार लगे ..

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ही सरल शब्द और असरदार शे’र वाली ग़ज़ल किरदार श्यामल सुमन जी।

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  6. आप सब के प्रति विनम्र आभार - स्नेह बनाये रखें।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 08.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

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