तुम्हे याद है हम दोनों पहले यहाँ आते थे
घंटो रेत पर बैठ कर
एक दुसरे की बातों में खो जाते थे
तुम घुटनों तक उतर जाती थी सागर के पानी में
और मै किनारे खड़ा तुम्हे देखता था
पहले तो तुम बहुत चंचल थी
लेकिन अब क्यों हो गई हो
समुद्र की गहराई की तरह शांत
और मै बेकल जैसे समुद्र में उठती लहर
समय के संग में प्यार की लहरें होतीं शांत।
जवाब देंहटाएंप्यासा है संतोष जब सुमन हृदय है क्लान्त।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
bahut bahut badhai
जवाब देंहटाएंshekhar kumawat
तुम अब हो गयी हो समुद्र की गहराई की तरह शांत
जवाब देंहटाएंऔर मै बेकल जैसे समुद्र में उठती लहर...
बेचैनी ने स्थान - परिवर्तन कर लिया है ....
बदलते मिज़ाज पर अच्छी कविता ...
तुम्हे याद है हम दोनों पहले यहाँ आते थे
जवाब देंहटाएंघंटो रेत पर बैठ कर
एक दुसरे की बातों में खो जाते थे
तुम घुटनों तक उतर जाती थी सागर के पानी में
और मै किनारे खड़ा तुम्हे देखता था
bahut acchi laine lagi ...