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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

प्रगति या पतन ???

मानते हैं हर राह में तुमने सफलता पाई


आसानी से निपटलिया प्रगति पथ पर जो भी मुश्किल आई

नित नव विषय पर तुमने आविष्कार किया

जड़ ज्ञान का तुमने खूब प्रचार किया

मानते है चद्रमा पर भी तुम विजय पताका फहरा आए

मृत्युके मुख से भी जीवन को छीन लाए

निज विवेक से आकाश में भी गमन किया

मानते हैं तीनो लोक का तुमने भ्रमण किया

मानते है तुमने कई मुश्किलों को आसान बनाया है

स्रष्टिके कई रहस्यों से तुमने परदा उठाया है

पर शायद भूल गए विज्ञानं कितना व्याल है

इसका वास्तविक रूप कितना विकराल है

क्या इतना करके भी तुम्हे मिली है शान्ति

सच बताओ क्या तुमने पाई है विश्रांति

भूल रहे हो ख़ुद को होकर विज्ञानं में अविरल अलमस्त

स्वयं को भी समय नही दे पा रहे हो हो गए हो इतना व्यस्त

जरा सोंचो और बताओ की यह प्रगति है या पतन ?

क्या सिर्फ़ इसी लिए है यह जीवन ?

भूल गए हो ऋषि मुनियों के पवित्र वचन

क्या करते हो कभी यम् नियम आशन और ब्रह्मचर्य का पालन ?

क्या इतना कर के भी मिति है तुम्हारी आरजू क्या बुझी है तुम्हारी "प्यास" ?

सभ्यता संस्कृति साहित्य आराधना भी है कुछ

क्या तुम्हे इस बात का है अहसास ????

जरा सोंचो और बताओ की यह प्रगति है या पतन

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी वैचारिक और इन्सान के कुछ अच्छा सोचने से उपजी इस बिचारोत्तेजक व्यंग के जरिये ,यथार्थ का चित्रण करती करती हुई आपके इस अच्छी संदेशात्मक और प्रेरक कविता के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद / अच्छा और ईमानदारी भरा सोच ही ,आज इस देश और मानवता को बचा सकता है / हम आपको अपने इस पोस्ट http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/04/blog-post_16.html पर देश हित में १०० शब्दों में अपने बहुमूल्य विचार और सुझाव रखने के लिए आमंत्रित करते हैं / उम्दा विचारों को हमने सम्मानित करने की व्यवस्था भी कर रखा है / पिछले हफ्ते अजित गुप्ता जी उम्दा विचारों के लिए सम्मानित की गयी हैं /

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