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शनिवार, 17 अप्रैल 2010

क्या है कविता ....(कविता ) ...कवि दीपक शर्मा

महज़ अलफाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता

कोई पेशा ,कोई व्यवसाय नही है कविता ।

कविता शौक से भी लिखने का काम नहीं

इतनी सस्ती भी नहीं , इतनी बेदाम नहीं ।

कविता इंसान के ह्रदय का उच्छ्वास है,

मन की भीनी उमंग , मानवीय अहसास है ।

महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नही हैं कविता

कोई पेशा , कोई व्यवसाय नहीं है कविता ॥

कभी भी कविता विषय की मोहताज़ नहीं

नयन नीर है कविता, राग -साज़ भी नहीं ।

कभी कविता किसी अल्हड यौवन का नाज़ है

कभी दुःख से भरी ह्रदय की आवाज है

कभी धड़कन तो कभी लहू की रवानी है

कभी रोटी की , कभी भूख की कहानी है ।

महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता,

कोई पेशा , कोई व्यवसाय नहीं है कविता ॥


मुफलिस ज़िस्म का उघडा बदन है कभी
बेकफन लाश पर चदता हुआ कफ़न है कभी ।
बेबस इंसान का भीगा हुआ नयन है कभी,
सर्दीली रात में ठिठुरता हुआ तन है कभी ।
कविता बहती हुई आंखों में चिपका पीप है ,
कविता दूर नहीं कहीं, इंसान के समीप हैं ।
महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता,
कोई पेशा, कोई व्यवसाय नहीं है कवित

9 टिप्‍पणियां:

  1. महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता,
    कोई पेशा, कोई व्यवसाय नहीं है कविता


    बिलकुल सही कहा दीपक जी आप ने .......

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  2. कविता से ही जाना क्या है कविता ...सरल शब्दों में सब कुछ बताया है आपने ...

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  3. महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता,
    कोई पेशा, कोई व्यवसाय नहीं है कवित

    BAHUT KHUB

    SHEKHAR KUMAWAT

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  4. bahut khub kavita ka sar likh diya hai aapne ....kavita me ...
    tariph k liye shabad nahi hai ...badhai

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  5. कविता की एक सही पहचान...बढ़िया रचना..दीपक जी बधाई

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  6. महज शब्दों का खिलवाड़ नहीं
    कविता कोई व्यवसाय नहीं
    दिल झूम रहा हो या उदास हो ...जो शब्द बिना प्रयास या सायास होठों के किनारे आ ठिठके ...कविता बन जाते हैं ...

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  7. कविता इंसान के ह्रदय का उच्छ्वास है,
    मन की भीनी उमंग , मानवीय अहसास है ।
    कभी कविता किसी अल्हड यौवन का नाज़ है
    कभी दुःख से भरी ह्रदय की आवाज है
    कभी धड़कन तो कभी लहू की रवानी है
    कभी रोटी की , कभी भूख की कहानी है ।
    बेबस इंसान का भीगा हुआ नयन है कभी,
    सर्दीली रात में ठिठुरता हुआ तन है कभी ।

    वाह जी वाह ! निहायक खुबसूरत और बेहतरीन कविता है ! आपकी यह परिभाषा बहुत पसंद आई ।

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  8. मानवीय अहसास है ।---यहीं कविता सामाजिक सरोकार होजाती है, जिसके बिना कविता का कोई अर्थ नही होता.
    ---खूबसूरत परिभाषा. बधाई.

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