उधर आसाम की राजधानी गुवाहाटी में सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. सुगन बरंठ की अध्यक्षता में सम्पन्न राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से गुजरात पुलिस एवं निरमा कंपनी द्वारा किये गये इस जघन्य कृत्य का कड़े शब्दों में विरोध करते हुए इस आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया। प्रस्ताव में सभी हमलावरों पर शीघ्रातिशीघ्र कानूनी कार्रवाई करने, सभी गिरफ्तार सत्याग्रहियों को रिहा करने एवं सीमेंट कंपनी को दी गयी मंजूरी को रद्द करने की मांग की गयी है।
ज्ञातव्य है कि भावनगर जिले के महुआ तहसील में गुजरात सरकार निरमा सीमेंट फैक्ट्री के लिए 15 गांवों की करीब 10 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित कर रही है। अधिग्रहण के कारण करीब 40 हजार लोगों की आजीविका छिन जायेगी एवं पर्यावरण पर गंभीर संकट उपस्थित होगा। कुछ ही वर्ष पहले इस क्षेत्र में गुजरात सरकार द्वारा 60 करोड़ रुपये खर्च कर चार छोटे बांध बनाये गये हैं, जिससे वर्षा-जल का संचय होता है और लोगों को पेयजल व कृषि के लिए पानी मिलता है। इस सीमेंट फैक्ट्री के बनने से यह सारा समाप्त हो जायेगा।
सर्व सेवा संघ मानता है कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने एवं अहिंसक विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में किसी के द्वारा भी इसपर किया गया हमला संविधान पर हमला है।
25 फरवरी 2010 को प्रभावित गांवों के ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह लोग साबरमती गांधी आश्रम, अहमदाबाद से गुजरात की राजधानी गांधीनगर तक मार्च करेंगे, जहां वे अपने रक्तों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन गुजरात सरकार को सौंपेंगे। सर्व सेवा संघ इस मार्च में शामिल होकर समर्थन करेगा।
आभार
नई आजादी
केशर
ऐसे अपराध निन्दक पात्र है । बढ़िया लेख
जवाब देंहटाएंसच में ऐसी घटनायें बहुत ही निन्दनीय है , आभार आपका ।
जवाब देंहटाएंकहीं ना कहीं हमारी प्रशासन ही पूर्णतया दोषी है । पता नहीं क्यों ऐसे मशलो पर कुछ भी शान्ति से नहीं हो पाता , अब दोष किसे दें ।
जवाब देंहटाएंदुर्भाग्यपूर्ण घटना . कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए...
जवाब देंहटाएंबेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना हैं ।
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