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रविवार, 28 फ़रवरी 2010

आओ खेले होली ....................रंजना (रंजू) भाटिया

मस्त बयार बहे
रंगों की बौछार चले
रंगे सब तन मन
चढ़े अब फागुनी रंग
कान्हा की बांसुरी संग
भीगे तपते मन की रंगोली
आओ खेले होली ..

टूट जाए हर बन्ध
शब्दों का रचे छंद
महके महुआ की गंध
छलके फ्लाश रंग
मिटे हर दिल की दूरी
आओ खेले होली


बहक जाए हर धड़कन
खनक जाए हर कंगन
बचपन का फिर हो संग
हर तरफ छाए रास रंग
ऐसी सजी फिर
मस्तानों की टोली
आओ खेले होली ..

कान्हा का रास रसे
राधा सी प्रीत सजे
नयनो से हो बात अनबोली
आओ खेले होली ....

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उम्दा रचना लगी , आपको होली की बहुत-बहुत बधाई ।

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  2. बहक जाए हर धड़कन
    खनक जाए हर कंगन
    बचपन का फिर हो संग
    हर तरफ छाए रास रंग
    ऐसी सजी फिर
    मस्तानों की टोली
    आओ खेले होली ..
    बहुत सुन्दर रचना सब को होली की हार्दिक शुभकामनायें

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  3. लाजवाब रचना...होली की शुभकामनाएं...

    नीरज

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  4. Bahut khub. lajwab kritee.
    Holi ki hardik subhkamnayen.

    Ashutosh Ojha

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  5. भल्‍ले गुझिया पापड़ी खूब उड़ाओ माल
    खा खा कर हाथी बनो मोटी हो जाए खाल
    फिरो मजे से बेफिक्री से होली में,
    मंहगाई में कौन लगाए चौदह किला गुलाल
    http://chokhat.blogspot.com/

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  6. "कान्हा का रास रसे
    राधा सी प्रीत सजे
    नयनो से हो बात अनबोली
    आओ खेले होली ...."
    सच्ची कामना - कवयित्री, हिंदी साहित्य मंच, सदस्य तथा पाठक सभी को होली "मंगल-मिलन" की हार्दिक शुभकामनाएं

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  7. फागुन की यह हवा ही कुछ ऐसी है शुभकामनाये

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  8. रंगोत्सव आपको और आपके परिवार को हर्ष और उल्लास से परिपूर्ण करे।
    डॉ० डंडा लखनवी

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  9. रंगोत्सव पर आपको शुभकामनायें रंजना जी

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