धन्यवाद शिखा जी ,स्पन्दन पर, आपका लेख का व वह वैचारिक धरातल, एसी ही स्थिति है जो स्वाधीनता से पहले हमारे लोगों ने अन्ग्रेज़ी व अन्गरेज़ी इतिहास पढकर उनकी कमज़ोरियों , कमियों,अत्याचारों, आदतों व अपनी कमियों के बारे में जान कर स्वाधीनता की नींव डालने का कार्य किया था. --मेरे ब्लोग -- http://shyamthot.blogspot.com ( the world of my thoughts.....)
पांच पंक्तियों में जीवन दर्शन सिखा दिया आपने....नमन आपकी लेखनी को.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद शिखा जी ,स्पन्दन पर, आपका लेख का व वह वैचारिक धरातल, एसी ही स्थिति है जो स्वाधीनता से पहले हमारे लोगों ने अन्ग्रेज़ी व अन्गरेज़ी इतिहास पढकर उनकी कमज़ोरियों , कमियों,अत्याचारों, आदतों व अपनी कमियों के बारे में जान कर स्वाधीनता की नींव डालने का कार्य किया था.
जवाब देंहटाएं--मेरे ब्लोग -- http://shyamthot.blogspot.com ( the world of my thoughts.....)
बहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार
इस उम्दा रचना के लिए बधाई .........
bahut hi accha likhte hai sir ji aap
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