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गुरुवार, 7 जनवरी 2010

अनजाने रिश्ते का एहसास ---(मिथिलेश दुबे)

अनजाने रिश्ते का एहसास,

बयां करना मुश्किल था ।

दिल की बात को ,

लबों से कहना मुश्किल था ।


वक्त के साथ चलते रहे हम ,

बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।

खामोशियां फिसलती रही देर तक,

यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।


सब्र तो होता है कुछ पल का ,

जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

वो दूर रहती तो सहते हम ,

पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।


अनजाने रिश्ते का एहसास ,
बयां करना मुश्किल था ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. खामोशियां फिसलती रही देर तक,


    यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।
    बहुत सुन्दर.

    जवाब देंहटाएं
  2. खामोशियां फिसलती रही देर तक,

    यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था

    Kya baat kahi hai ...MASHAALLAH bhaut khoob

    जवाब देंहटाएं

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