प्रिये ,
आज तुम फिर क्यों ?
इतनी देर से आयी हो ,
तुम्हारे इंतजार में मैंने
कितने ही सपने सजाये
पर तुम्हारे बगैर ये कितने
अधूरे से हैं ।
मैंने तो कितनी ही बार
तुमसे शिकायत की
पर
तुमने हमेशा ही अपनी
मुस्कुराहट से ,
जीत लिया मुझे,
तुमसे इस तरह तुम्हारी शिकायत करना
अच्छा लगता है मुझे ,
प्रिये,
तुम्हारा इंतजार करते- करते
मैंनें बंद कर ली थी आंखें,
बंद आंखों में तुम्हारी
यादे तैरने लगी थी ,
एक उम्मीद थी कि
शायद इन यादों के साथ
नींद के आगोश में
समा जाऊं मैं ,
करवटें बदल- बदल कर
कोशिश की थी ,
रात भर सोने की
पर
सफल न हो सका था ।
कमरे के दरवाजे से
मंदिर के जलते दिये
की रोशनी ,
चांद की किरणों को
मद्धम कर रही थी ,
मैं तो चुपचाप ही ये
खेल देख रहा था ।
ऐसे में हवा के एक झोंके ने,
बुझा दिया था इस रोशनी को ,
जिसे देख मैं इंतजार कर रहा था तुम्हारा,
उस झोंके ने कोशिश की थी
मेरे विश्वास को तोड़ने की ,
पर मुझे पता है कि
तुम आओगी जरूर प्रिये ,
पर
देर से ही
और मैं
तुमसे करूंगा ढ़ेर सारी
शिकायतें
तुम चुप रह कर सुनती रहोगी
फिर
मुस्कराकर मेरा दिल जलाओगी
प्रिये ,
तुम्हारी ये अदा
मुझे सताती है ,
मेरे दिल को भाती है
इसलिए तो
तुम्हारा इंतजार करना
अच्छा लगता है ।
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बुधवार, 30 सितंबर 2009
कविता.........................नीशू
विकलांगता- एक अभिशाप ( सूचना)
विकलांगता एक अभिशाप यह धारणा समाज में बहुप्रचारित है , कहीं इसे पुर्नजन्म के कर्मों से जोड़कर देखा जाता है तो कहीं पाप और पुण्य से जोड़कर । परन्तु यह अवधारणा समाज में धीरे धीरे बदली है । शिक्षा का प्रभाव अपना असर दिखा रहा है । ऐसे में हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हम ऐसे लोगों की मदद कर इसने जीवन को सही दिशा में लाने का प्रयास करें ।
दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में विकलांगता दिवस मनाया जाता है । जागरूकता फैलाकर समाज में विकलांग व्यक्ति को मुख्यधारा में शामिल करने की कोशिश की जाती है । लोगों की भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की जाती है ।
ऐसे में आप भी अपनी सहभागिता देकर इस प्रकार के कार्य को सही दिशा दे सकते हैं । आप अपने विचार , लेख , आलेख , कविता , गीत ( जो विकलांगता पर केन्द्रित हो ) या भी अन्य विधाओं को भेज सकते हैं । इसके लिए ई-मेल पता है - hindisahityamanch@gmail.com . आपके आलेख , लेख , गीत , कविता या किसी भी विधा को समर्पण पत्रिका के " विकलांग विशेषांक" में प्रकाशित किया जायेगा ।
आपको यदि विकलांग व्यक्तियों की मदद के लिए किसी संस्था या फिर अन्य माध्यम के बारे में जानकारी हो तो हमसे जरूर संपर्क करें ।
संचालक ( हिन्दी साहित्य मंच )
दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में विकलांगता दिवस मनाया जाता है । जागरूकता फैलाकर समाज में विकलांग व्यक्ति को मुख्यधारा में शामिल करने की कोशिश की जाती है । लोगों की भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की जाती है ।
ऐसे में आप भी अपनी सहभागिता देकर इस प्रकार के कार्य को सही दिशा दे सकते हैं । आप अपने विचार , लेख , आलेख , कविता , गीत ( जो विकलांगता पर केन्द्रित हो ) या भी अन्य विधाओं को भेज सकते हैं । इसके लिए ई-मेल पता है - hindisahityamanch@gmail.com . आपके आलेख , लेख , गीत , कविता या किसी भी विधा को समर्पण पत्रिका के " विकलांग विशेषांक" में प्रकाशित किया जायेगा ।
आपको यदि विकलांग व्यक्तियों की मदद के लिए किसी संस्था या फिर अन्य माध्यम के बारे में जानकारी हो तो हमसे जरूर संपर्क करें ।
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