मीणा आशा के सफलता की प्राप्ति नहीं होती !
इच्छा हर मनुष्य करता है और इच्छा करनी भी चाहिए यदि हम किसी वस्तु की इच्छा तो उसे पाने की चेष्टा करते है और उसे प्राप्त कर लेतें है !
इच्छा आवश्यकता की जननी है और आवश्यकता अविष्कार की, पहले हम किसी भी वस्तु की इच्छा करते है तब हमे उस वस्तु की आवश्यकता पड़ती है परिणामस्वरूप हम उस वस्तु का अविष्कार कर उसकी प्राप्ति कर लेतें है ! अत: इच्छाओं को कभी नहीं मारना चाहिए हमें तो अधिक से अधिक "आशा" और "इच्छ" करनी चाहिए ताकि हम सफलता और नये आविष्कारों की प्राप्ति कर सकें !
इच्छा आवश्यकता की जननी है और आवश्यकता अविष्कार की, पहले हम किसी भी वस्तु की इच्छा करते है तब हमे उस वस्तु की आवश्यकता पड़ती है परिणामस्वरूप हम उस वस्तु का अविष्कार कर उसकी प्राप्ति कर लेतें है ! अत: इच्छाओं को कभी नहीं मारना चाहिए हमें तो अधिक से अधिक "आशा" और "इच्छ" करनी चाहिए ताकि हम सफलता और नये आविष्कारों की प्राप्ति कर सकें !
रचना जीवन की अभिव्यक्ति है।
जवाब देंहटाएंलेख बढ़िया रहा ।
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