बहुत ही उम्दा गजल।
शानदार अभिव्यक्ति। बधाई
waah lajawab
कम्प्यूटर किताबें याद रहींतितलियों का ठिकाना भूल गएफल तो आते नहीं थे पेडों परअब तो पंछी भी आना भूल गएबेहतरीन.
क्या बात है । बहुत ही सुन्दर रचना । बधाई
बहुत ही सुन्दर रचना...
आप की इस ग़ज़ल में विचार, अभिव्यक्ति शैली-शिल्प और संप्रेषण के अनेक नूतन क्षितिज उद्घाटित हो रहे हैं।
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बहुत ही उम्दा गजल।
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जवाब देंहटाएंwaah lajawab
जवाब देंहटाएंकम्प्यूटर किताबें याद रहीं
जवाब देंहटाएंतितलियों का ठिकाना भूल गए
फल तो आते नहीं थे पेडों पर
अब तो पंछी भी आना भूल गए
बेहतरीन.
क्या बात है । बहुत ही सुन्दर रचना । बधाई
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर रचना...
जवाब देंहटाएंआप की इस ग़ज़ल में विचार, अभिव्यक्ति शैली-शिल्प और संप्रेषण के अनेक नूतन क्षितिज उद्घाटित हो रहे हैं।
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