हर ओर है आज दंगा, अत्याचार मचा, माराकाटी के इस दौर से कोई नहीं बचा, डरता हूँ मैं इस खूनी दौर से बहुत, भाग कर इस दौर से ऐ दिल कहीं और चलें। . नहीं जहाँ में चैन न अमन ही रहा, मानव अब तो अपने साये से डर रहा, कत्ल न कर दे कहीं खुद हमारा साया, डर से कत्ल होने के ऐ दिल कहीं और चलें। . लुट गये खजाने खुशियों के हम सभी के, छीन ले गये हर खुशी दामन से हमारे, गमगीन माहौल में जीना लगता है मुश्किल, खुशी एक पल की पाने ऐ दिल कहीं और चलें। . बसेगा कब चमन खुशहाली का यहाँ, मिटाकर अँधेरा कब उजाला फैलेगा यहाँ, चाह है एक सुन्दर शांतिमय संसार की, जहाँ प्यारा सा बसाने ऐ दिल कहीं और चलें।
सुन्दर कविता के लिए
जवाब देंहटाएंडॉ.कुमारेन्द्र सिंह सेंगर जी को बधाई!
सच्चाई का दर्पण दिखा दिया आपने।
जवाब देंहटाएं-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }