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बुधवार, 20 मई 2009

लैंपपोस्ट [ एक कविता ] -Neeshoo tiwari

सड़क के किनारे का

वो लैम्पपोस्ट,

कितना बेबस लगता है ,

आते-जाते लोगों को ,

चुपचाप देखता है ,

अपनी रोशनी से

करता है रोशन शामों शाहर को,

और

खुद अंधेरा सहता है,

कपकपाती ठंड,

सर्द हवा,

कोहरे की धुंध ,

कुत्ते की भौक,

सोया हुआ इंसान ,

यही साथी हैं उसके,

शांत , निश्चल

पर आत्मविश्वास से ,

भरा हुआ,

खड़ा रहता है वह,

हमेशा,

इंसान की राहों को ,

रोशन करने ,

खुद को जलाकर,

कितना निःस्वार्थ,

निश्कपट,

निरछल

भाव से,

करता है अपना

समर्पण ,

दूसरों के लिए ।।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह कविता वास्तविक जीवन को दर्शाती है । सुन्दर चित्रण किया है आपने । बधाई

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  2. लैम्प पोस्ट् के माध्यम से एक सुन्देर सन्देश देती कविता जो दूसरों के लिये जीते हैं उन्हें त्याग करना ही पडता है मल्लाह के हुक्के मे पानी कहाँ होता है सुन्देर कविता के लिये बधाई

    जवाब देंहटाएं
  3. हम सभी को खुद के लिए ही नहीं जीना चाहिए । प्रेरित करती यह रचना बहुत ही अच्छी बनी है ।

    जवाब देंहटाएं
  4. waah nishoo ji ,

    shaandar kavita , zindagi ke darshan ko darshati hui ...
    aapne bahut accha likha hai .

    meri dil se badhai sweekar kariyenga

    vijay
    www.poemsofvijay.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं

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