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सोमवार, 13 अप्रैल 2009

पति परमेश्वर................[एक कविता] प्रिया प्रियम तिवारी की

तुम पति परमेश्वर हो,
तुम्हारे सारे अधिकार
मिले हैं, ईश्वर प्रदत्त,
तुम मेरे मान सम्मान के
रखवाले हो,
पर
जब चाहे मेरे मान सम्मान को
आहत कर सकते हो।

परमेश्वर बनकर मिल गया है
तुम्हें अधिकार ,
मेरे सम्मान को
कुचलने का
मैं तुम्हारी पत्नी हूँ,
श्रद्धा और त्याग की मूरत
अर्पण करूँ खुद को
तुम्हारे चरणों में
अपने अरमानों की चिता पर
पूरे होने दूँ तुम्हारे अरमान
तब मैं पत्नी हूँ "
आदर्श भारतीय पत्नी ।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिया जी , इतनी सुन्दर आपने पेश की प्रशंसा के लिए शब्द ही नहीं है हमारे पास । पत्नी की व्यथा और समर्पण का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती आपकी यह रचना । बहुत बहुत बधाई

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  2. बहुत ही सुन्दर कविता । आपको बहुत बहुत बधाई

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  3. ... प्रभावशाली व प्रसंशनीय रचना ।

    जवाब देंहटाएं

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